Monday, Jan 21, 2019

अयोध्या भूमि विवाद मामला : संविधान पीठ की सुनवाई पर होंगी सब की नजरें

  • Updated on 1/11/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सुप्रीम कोर्ट की 5 न्यायाधीशों की संविधान पीठ राजनीतिक रूप से संवेदनशील अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर गुरुवार को सुनवाई करेगी। यह पीठ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करेगी। 

CBI अधिकारियों के तबादले पर आलोक वर्मा ने उठाया बड़ा कदम

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली इस पांच सदस्यीय संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस एन वी रमण, जस्टिस उदय यू ललित और जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ शामिल हैं। शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने गत वर्ष 27 सितंबर को 2 :1 के बहुमत से मामले को शीर्ष अदालत के 1994 के एक फैसले में की गई उस टिप्पणी को पुर्निवचार के लिये 5 सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजने से मना कर दिया था जिसमें कहा गया था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है। 

रविशंकर प्रसाद बोले- मैच जिताने वाला छक्का है सामान्य वर्ग का आरक्षण

मामला अयोध्या भूमि विवाद मामले पर सुनवाई के दौरान उठा था। जब मामला चार जनवरी को सुनवाई के लिये आया था तो इस बात का कोई संकेत नहीं था कि भूमि विवाद मामले को संविधान पीठ को भेजा जाएगा क्योंकि शीर्ष अदालत ने बस इतना कहा था कि इस मामले में गठित होने वाली उचित पीठ 10 जनवरी को अगला आदेश देगी। 

सिब्बल ने पूछा- जब रोजगार ही नहीं, तो आरक्षण का लाभ किसे मिलेगा?

नवगठित पांच सदस्यीय पीठ में न केवल मौजूदा प्रधान न्यायाधीश होंगे बल्कि इसमें चार अन्य न्यायाधीश भी होंगे जो भविष्य में सीजेआई बन सकते हैं। जस्टिस गोगोई के उत्तराधिकारी जस्टिस बोबडे होंगे। उनके बाद जस्टिस रमण, जस्टिस ललित और जस्टिस चंद्रचूड़ की बारी आएगी।  

AAP ने आर्थिक आधार पर आरक्षण को लेकर रुख किया साफ, निशाने पर RSS

अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से संबंधित 2.77 एकड़ भूमि के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 30 सितंबर, 2010 के 2:1 के बहुमत के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में 14 अपीलें दायर की गयी हैं। 

CBI निदेशक वर्मा पर फैसले के लिए CJI ने जस्टिस सीकरी को किया मनोनीत

उच्च न्यायालय ने इस फैसले में विवादित भूमि सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के बीच बराबर- बराबर बांटने का आदेश दिया था। इस फैसले के खिलाफ अपील दायर होने पर शीर्ष अदालत ने मई 2011 में उच्च न्यायालय के निर्णय पर रोक लगाने के साथ ही विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था।


 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.