Thursday, Mar 21, 2019

PAK पर एयर स्ट्राइक के बाद भारत- म्यांमार आर्मी ने किया ज्वाइंट ऑपरेशन, दर्जनों आतंकी कैंप तबाह

  • Updated on 3/15/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपना सख्‍त रुख कायम किया है। बालाकोट में भारतीय वायुसेना की तरफ से जैश-ए-मोहम्‍मद के ठिकानों पर अभी कुछ दिनों पहले ही हवाई कार्रवाई की गई थी। उस वक्त देश के दूसरे छोर पर एक बेहद खास और खुफिया मिशन को अंजाम देने की तैयारी की जा रही थी। अभी- अभी पता चला कि भारतीय सेना ने अब म्‍यांमार आर्मी के साथ मिलकर म्‍यांमार सीमा पर मौजूद आतंकियों के कई ठिकानों को नेस्‍तनाबूद कर दिया।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारतीय सेना ने म्‍यांमार आर्मी के साथ मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर पूर्व के लिए बड़े और अहम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट इन आतंकी संगठनों के निशाने पर थे।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक म्यांमार का विद्रोही समूह रोहिंग्या आतंकी समूह अराकान आर्मी ने मिजोरम सीमा पर नए ठिकाने बना लिए थे। जो कलादान प्रोजेक्‍ट को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। यही कालादान प्रोजेक्ट कोलकाता से म्यांमार के सितवे पोर्ट को कनेक्ट करने वाला है। यह प्रोजेक्ट फ्यूचर में नॉर्थ- ईस्ट का नया गेटवे होगा।

सूत्रों के अनुसार अराकान आर्मी को काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी द्वारा नॉर्थ बॉर्डर चीन तक ट्रेनिंग दी गई। विद्रोहियों ने अरुणाचल से सटे क्षेत्रों से मिजोरम सीमा तक की 1000 किमी की यात्रा भी की थी।

भारत- म्यांमार आर्मी के ज्वाइंट ऑपरेशन की योजना कई चरणों की थी। पहले चरण में मिजोरम की सीमा पर नवनिर्मित शिविरों को ध्‍वस्‍त करने के लिए बड़े पैमाने पर संयुक्त अभियान शुरू किया गया था, जबकि ऑपरेशन के दूसरे भाग में ने टागा में NSCN (K) के मुख्यालय को निशाना बनाया गया और कई शिविरों को नष्ट कर दिया गया। संयुक्त भारत- म्यांमार यह ऑपरेशन NSCN (K) के खिलाफ 2 सप्ताह लंबा चला।

आपको बता दें कि भारत- म्यांमार आर्मी के ज्वाइंट ऑपरेशन में भारत- म्यांमार बॉर्डर पर मौजूद आतंकियों और उनके कैम्प खात्मा कर दिया। सूत्रों द्वारा पता चला कि यह मिशन 17 फरवरी से 2 मार्च तक चला था। जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को बचाने के लिए किया था।

क्या है इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट

म्यांमार में सितवे बंदरगाह के जरिए कोलकाता को मिजोरम से जोड़ा जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही कोलकाता से मिजोरम के बीच हजार किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। लेकिन काफी समय से यह प्रोजेक्ट इस एरिया में एक्टिव आतंकी संगठनों के निशाने पर था। अभी इसपर यात्रा करने में करीब 4 दिन का समय लगता है।

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