Sunday, Nov 28, 2021
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खुद बनवाया था अपने लिए ग्यासुद्दीन तुगलक ने मकबरा

  • Updated on 9/6/2021

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। उस्मानी सल्तनत के बादशाह सुलेमान हो या फिर शाहजहां सभी ने अपनी मौत से पहले ही अपने मकबरे को तामील कर दिया था। इसी तरह ग्यासुद्दीन तुगलक ने भी कुतुब-बदरपुर सडक पर अपने लिए जिंदा रहते ही ‘दारूल अमन’ यानि ‘शांति का आवास’ अपने मकबरे के रूप में बनवाया था। ये ग्यासुद्दीन का स्वनिर्मित मकबरा एक छोटे किले की तरह दिखाई देता है जोकि आज भी तुगलक वंश के इतिहास की गाथा गाता है। इस मकबरे को 1328 ईसवीं में बनाया गया था।
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सफेद संगमरमर का बना हुआ है गुंबद
बता दें कि इस मकबरे को ऊंचीं-ऊंचीं झुकाव वाली पंचभुजीय पत्थर की दीवारों के घेरे में तथा बुर्जों से सुदृढ किया गया था। मूल रूप से एक विशाल जलाशय के भीतर यह मकबरा खडा है जोकि तुगलकाबाद किले से पहले खुद को जोडता था लेकिन अब बीच से सडक निकलने की वजह से अलग हो गया है। मकबरे में प्रवेश के लिए लाल बलूआ पत्थरों के विशाल दरवाजे से होकर जाते हैं जिस पर सीढियां बनी हुईं है। यह मकबरा लाल बलुआ पत्थर की ढलवां दीवारों तथा कंगूरों से घिरा लगभग 8 मीटर का है इसके ऊपर सफेद संगमरमर का गुंबद बना हुआ है जो एक अष्टभुजाकार ढोल पर बनाया गया है। इसके मेहराबों के किनारे पर जालीदार संगमरमर के परदे लगे हुए हैं और कमल कलियों के झब्बों के साथ मिलकर लाल बलुआ पत्थर बेहद खुबसूरत लगते हैं। 
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मकबरे के भीतर हैं तीन कब्रें
इस मकबरे के अंदर तीन कब्रें हैं। इतिहासकारों का कहना है कि इनमें से एक मुख्य कब्र ग्यासुद्दीन तुगलक की है और दो में एक बेगम व एक पुत्र मुम्मद बिन तुगलक की है। हालांकि मकबरे के उत्तर-पश्चिमी बुर्ज में दक्षिणी दरवाजे के ऊपर अभिलिखित पत्थर सहित अष्टभुजाकार मकबरा भी है। अभिलेख के अनुसार यहां किसी जफर खां को दफनाया गया था जोकि दिल्ली सल्तनत का मशहूर जनरल था और उसने बहुत सी लडाईयां जीती थीं। उसके लिए कहावत थी कि मंगोलों के घोडे उसके नाम से पानी पीने से इंकार कर देते थे कि कहीं उन्हें जफर खान तो नहीं देख रहा। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जफर खां का मकबरा पहले से यहां स्थित था लेकिन ग्यासुद्दीन ने निर्माण कार्य के दौरान उसके मन में विचार आया होगा कि एक अहाता बनाकर उसके भीतर खुद का मकबरा तैयार करवाया जाए। इसीलिए उसने अपने मकबरे के ऊपर ‘दारूल अमन’ लिखवाया।
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जाने कौन था ग्यासुद्दीन तुगलक
ग्यासुद्दीन तुगलक दिल्ली सल्तनत में तुगलक वंश का शासक था। जिसे गाजी मलिक या तुगलक गाजी के नाम से भी जाना जाता है। वो 1320 में दिल्ली के सिंहासन पर बैठा। जिसने 29 बार मंगोलों के आक्रमण को विफल किया। हालांकि उसका पिता करौना तुर्क गुलाम था। भारत में नहरों का निर्माण करवाने वाला पहला सुल्तान था। उसने ही तुगलकाबाद किले का निमार्ण शुरू किया था। उसके शासनकाल में पहली बार दक्षिण के राज्यों को दिल्ली सल्तनत में मिलाया गया था।


 

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