Monday, Jun 27, 2022
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indian literature and culture has spread in the world: speaker

विश्व में फैली है भारतीय साहित्य व संस्कृति:वक्ता

  • Updated on 1/28/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में  'गणतंत्र भारत की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक व्यापकता विषय पर वेबीनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारत के अलावा 12 अन्य देशों के वक्ताओं ने अपने विचारों को व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की संस्कृति और साहित्य विश्व भर में फैला हुआ है। उत्थान फाउंडेशन के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय वेबीनार की संचालिका अरूणा घवाना ने बताया कि भारत से इतर 12 देशों के वक्ताओं ने इस वेबीनार की अंतरराष्ट्रीय व्यापकता को सार्थक किया। 

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वेबीनार की मुख्य अतिथि न्यूजीलैंड से डॉ पुष्पा भारद्वाज वुड ने कहा कि भारत के बाहर बसे भारत को पहचानने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसा महसूस होता है कि विदेशों में ही एक भारत बस गया है। त्रिनिदाद टोबैगो से भारतीय उच्चायोग में द्वितीय सचिव (हिंदी, शिक्षा एवं संस्कृति) के पद पर कार्यरत शिव कुमार निगम ने कहा कि भारत का साहित्य और संस्कृति विश्वभर के देशों में फैली है। त्रिनिदाद से ही रुकमिणी होल्लास ने काव्य पाठ किया।
नीदरलैंड से प्रो मोहनकांत गौतम ने साझा किया कि 1950 के बाद साहित्य में काफी बदलाव देखा गया। 

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यूके से लेखनी संपादिका शैल अग्रवाल ने प्रवासी भारतीयों के साहित्य के अंश साझा किए और बताया कि प्रवासी साहित्य का व्यापकता में अपना महत्व है। मॉरीशस से संस्कृति अधिकारी डॉ राकेश श्रीकिसून ने मॉरीशस की संस्कृति पर भारत की छाप का वर्णन किया। फीजी से प्राध्यापक मनीषा रामरक्खा ने अपने वक्तव्य में वहां पढ़ाए जा रहे भारतीय साहित्य का भी जिक्र किया। सूरीनाम से लैला लालाराम, ने सूरीनाम में अपनाई जा रही भारतीय संस्कृति के बारे में चर्चा की। 
स्वीडन से इंडो स्कैंडिक संस्था के वाइस प्रेसिडेंट सुरेश पांडेय ने संस्मरण, पोलैंड से मैटीरियल साइंस के वैज्ञानिक डॉ संतोष तिवारी ने कविता सुनाकर सबको गणतंत्र दिवस की बधाई दी। कार्यक्रम में यूएई से कवियत्री मंजू तिवारी व यूएसए से शुभ्रा ओझा ने कहा बदलते समय के साथ अब स्थितियां अधिक बेहतर हैं।अतिथि वक्ता प्रो विमलेश कांति वर्मा ने कहा कि साहित्य और संस्कृति की बात करने से पहले उसके भाव को समझना जरूरी है। केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा की निदेशक प्रो बीना शर्मा ने भी सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। 

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