Wednesday, Jun 26, 2019

मोदी-इमरान के बीच क्या पिघलेगी रिश्तों की बर्फ!

  • Updated on 6/12/2019

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। फिर से एक बार भारत (india) और पाकिस्तान (pakistan) आमने-सामने होंगे। लेकिन यह कोई युद्ध का क्षेत्र नहीं होगा। हां कूटनितिक युद्ध से इनकार नहीं किया जा सकता है। वो भी जब ऐसे शिखर सम्मेलन जहां भारत और उनके दोस्त रुस (russia) होंगे तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान अपने सबसे बड़े पैरवीकार चीन (china) के साथ एक ही मंच पर खड़े होंगे।

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कहने को तो एक ही मंच है लेकिन दिल तो भारत और पाकिस्तान के नहीं मिलेंगे। यह बैठक 13 जून को किर्गिस्तान (kirgistan) में होगी जहां 8 देश वैश्विक समस्या पर चर्चा करेंगे तो वहीं अमेरिका (america) के बढ़ते दवाब को कम करने की रणनीति पर भी अहम निर्णय लेगी।

दोनों देशों के आईने से अगर रिश्ते को परखा जाए तो फरवरी में पुलवामा एटैक से लेकर भारत के बालाकोट एयर स्टराइक होने तक रिश्तों में काफी खटास आ गई है। इस दूरी को पाटने के लिए हालांकि पाकिस्तान ने भारत के विंग कमांडर अभिनंदन की 24 घंटे में वापसी और फिर प्रधानमंत्री के किर्गिस्तान जाने की खबर पर अपने हवाई क्षेत्र को खोलने की घोषणा की लेकिन भारत है कि मानता नहीं।

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भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर जीरो टोलरेंस की नीति नहीं अपनाता है। तब तक बातचीत करना बेईमानी होगी। लोकसभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मौके पर सख्त लहजे में कहा था कि भारत अब बदल चुका है। भारत को देखने के लिए नए चश्मे की जरुरत है। उन्होंने पाकिस्तान को लेकर आक्रामकता दिखाते हुए कहा था कि एक भी हमला अगर होता है तो 'घर में घुसकर मारेंगे'।

शायद ही कोई प्रधानमंत्री हो जिसने पाकिस्तान के लिए इतनी बेबाकी से बयान दिया होगा। लेकिन अपनी छवि के अनुरुप कड़े फैसले लेने वाले नेता के तौर पर जाने जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार चौंकाने वाले फैसले लेने से परहेज भी नहीं करते है। जैसा कि उन्होंने अपने पहले शपथ ग्रहण में पाकिस्तान को आमंत्रण करके उतना ही चौंकाया था जितना तबके प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घर पहुंच कर।

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उस समय विपक्षी दलों ने उनकी कूटनीति की आलोचना भी की थी। इस सबसे बेपरवाह होकर पाकिस्तान गए। तो क्या माना जाए कि जब भारत और पाकिस्तान एक ही मंच पर होंगे तो मोदी फिर से कुछ ऐसा निर्णय ले सकते है जो दोनों देशों के दीर्घकालीन हित के लिए बेहतर हो। यह तो बैठक के बाद ही तय हो पाएगा। 

लेकिन चीन ने जिस तरह से भारत से अपील की है कि वो इस सम्मेलन में आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर हमला न करे। इसको उस कड़ी में माना जा सकता है कि अभी अमेरिका ने जिस तरह से भारत पर दवाब बनाकर ईरान से तेल नहीं खरीदने के लिए कहा। यह भारत के गले नहीं उतरा। ऊपर से व्यापारिक तरजीह वाला दर्जा भी भारत से अमेरिका ने वापस ले लिया तो नए वैश्विक समीकरण में अमेरिका पर दवाब बनाने के लिए भारत इस पाकिस्तान के प्रति थोड़ा लचीला रुख अपना सकता है।

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क्योंकि वैश्विक कूटनीति में भारत को रुस के साथ- साथ चीन की भी आवश्यकता है। इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र में चीन ने भारत की मांग पर मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकवादी घोषित करने में अड़ंगा नहीं लगाया। इससे तो लगता है कि शायद बदले माहौल में चीन भारत से भी कहीं न कहीं अपनी बात मनवा सकता है। इसलिए इससे इनकार नहीं किया जा सकता भले ही भारत पाकिस्तान से तुरंत बातचीत का दौर न शुरु करे। लेकिन कुछ मुद्दों पर लचीला रुख अपना सकता है।  

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