Wednesday, Dec 01, 2021
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नए अमेरिकी विदेश मंत्री विवाद पर भारत को चिंता की जरूरत नहीं

  • Updated on 12/15/2016

Navodayatimesनई दिल्ली, (रंजीत कुमार): अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के  उलजलूल बयानों के मद्देनजर भारत से रिश्तों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं लेकिन अमेरिका के एक बिजनेसमैन को विदेश विभाग की जिम्मेदारी सौपने का एलान होने से भारत में राहत की सांस ली जा सकती है।

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हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री के लिये नामजद रेक्स टिलरसन को लेकर अमेरिकी के राजनयिक हलकों में भी गहरा विवाद पैदा हो गया है, भारत यह उम्मीद कर सकता है कि आदर्श- वैचारिक बातों को अहमियत देने के बदले बिजनेस जैसा लेनदेन में विश्वास करने वाले टिलरसन के पद सम्भालने से भारत अमरीका के रिश्तों में अधिक व्यावहारिकता देखी जाएगी। 

हालांकि अमेरिकी पेट्रोलियम कम्पनी एक्सोन मोबिल के प्रमुख रेक्स टिलरसन को निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा विदेश मंत्री का महत्वपूर्ण  दायित्व  सौंपे जाने पर यहां  राजनयिक हलकों में हैरानी है क्योंकि उनका न तो राजनय या अकादमिक या फिर  सैन्य दुनिया में कोई करियर रहा है।

पूरी तरह बिजनेस में अपना करियर बिताने वाले रेक्स टिलरसन की विशेष योग्यता यह है कि वह निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अलावा रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन के भी नजदीकी रहे हैं। पुतिन के साथ विशेष सम्बन्धों के मद्देनजर अमेरिकी राजनयिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं क्योंकि डोनाल्ड ट्रम्प के चुनाव में रूसी हस्तक्षेप की रिपोर्टें भी इन दिनों अमेरिकी सामरिक हलकों में चर्चा में है।

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एक सफल अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक कम्पनी के प्रमुख होने के नाते रेक्स टिलरसन निश्चय ही अपने  करियर में कामयाबी की चोटी पर पहुंचे और एक्सोन मोबिल की मौजूदगी 60 से अघिक देशों  में बनाई है। खासकर उन देशों में जो राजनीतिक व सामाजिक तौर पर अस्थिर देश माने जाते हैं। रूस के पेट्रोलियम क्षेत्र में व्यापक भागीदारी करने में सफलता की वजह टिलरसन की रूसी राष्ट्रपति पुतिन से खास दोस्ती बताई जाती है।

रूस के साथ दुश्मनी का रिश्ता त्यागने की बात करने वाले डोनाल्ड ट्रम्प ने शायद इसलिये टिलरसन को अमेरिकी विदेश विभाग का दायित्व सौंपने का फैसला किया है कि उनके पुतिन से विशेष रिश्ते तो हैं ही उनके कई विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से भी सीधे सम्पर्क हैं। टिलरसन रूस के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों का भी विरोध करते रहे हैं।

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वह ईरान पर भी किसी तरह का आर्थिक प्रतिबंध नहीं चाहते। हालांकि ईरान को लेकर डोनाल्ड ट्रम्प ने काफी खतरनाक बयान दिये हैं लेकिन चूंकि ट्रम्प खुद भी एक बिजनेसमैन हैं इसलिये वह ईरान के साथ मघुर रिश्तों में ही अमेरिकी का भला देखेंगे। टिलरसन के इन विचारों के अनुरूप यदि अमेरिकी विदेश नीति की दिशा तय होगी तो भारत के लिये चिंता की बात नहीं होनी चाहिये। 

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