Wednesday, Dec 08, 2021
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इस नदी में अचानक आई कछुओं की सुनामी, जीव वैज्ञानिक हुए हैरान, जाने क्या है इसका रहस्य

  • Updated on 12/17/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। क्या आपने कभी नदी में आने वाली सुनामी के बारे में सुना है, शायद नहीं लेकिन ब्राजील की एक नदी में एक अलग तरह की सुनामी आ गयी है। यह सुनामी है कछुओं की सुनामी। इस नदी में कछुओं की ऐसी सुनामी आई कि कछुओं की पूरी लहर की लहर रेत तक आ गई। 

ब्राजील की इस नदी के तट पर कछुओं की ये सुनामी सभी के लिए हैरत की बात बन गई है। लेकिन इसका सच क्या है आइए हम आपको बताये देते हैं।

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तस्वीर से खुला राज
इस सुनामी का पता तब लगा जब ब्राजील के द वाइल्डलाइफ कंजरवेशन सोसाइटी (WCS) ने इन ढेरों कछुओं की तस्वीरें और वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किए। डब्लूसीएस ने बताया कि ये कछुए जायंट साउथ अमेरिकन रिवर टर्टल  (Giant South American Turtles) प्रजाति के बच्चे हैं, जो अंडों से निकल कर सीधे तट की तरफ भागे थे।

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तकरीबन 1 लाख कछुए
जबकि इस नदी पर यह मिले वो ब्राजील अमेजन नदी की एक शाखा है जिसे पुरूस नदी (Purus River) कहा जाता है। इस नदी के किनारों पर जायंट साउथ अमेरिकन रिवर टर्टल (Giant South American Turtles) के हजारों बच्चों को देखा गया।

डब्लूसीएस ने इस बारे में और जानकारी देते हुए बताया कि यहां इस नदी के किनारों पर दो दिनों में करीब 92 हजार कछुए देखे गए हैं। यहां पहले दिन 71 हजार कछुए मिले थे जबकि और दूसरे दिन 21 हजार कछुए तटों पर दिखे। 

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देते हैं इतने अंडे
डब्लूसीएस के मुताबिक कछुओं का एक जोड़ा एक बार में 80 से 120 अंडे देते हैं और अंडों से 60 दिन के बाद बच्चे बाहर आने लगते हैं। हालांकि ऐसा कई बार पहले भी देखने को मिला है लेकिन इस बार ये ढेरों कछुओं की सुनामी ब्राजील के अबुफारी बायोलॉजिकल रिजर्व (Abufari Biological Reserve) के बीच से गुजरी थी और पुरूस नदी के तटों पर दिखाई पड़ी।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट
डब्लूसीएस की एक्सपर्ट कैमिला फरारा ने इस बारे में बताया कि कछुओं को इतनी ज्यादा तादात में देखनाकाफी अच्छा है। ये जन्म का उत्सव है और इससे जायंट साउथ अमेरिकन रिवर टर्टल (Giant South American Turtles) की प्रजाति को नया वंश और अधिक बढ़ावा मिलेगा। इन कछुओं की एक बात सबसे खास है कि यह एक साथ जन्म लेते हैं और एक साथ ही पूरी जिंदगी पूरा करते हैं। बता दें, यह प्रजाति कछुओं की एक विलुप्तप्राय प्रजाति है। इस प्रजाति के संरक्षण के लिए इंटरनेशनल लेवल पर कई समझौते हुए हैं।

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