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आखिर ट्रम्प ने क्यों की वामपंथी आतंकवादी संगठन 'एंटीफा' को बैन करने की मांग

  • Updated on 6/2/2020

नई दिल्ली टीम डिजिटल। अमेरिका (america) में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड (george flood) की मौत के बाद से भड़की हिंसक भीड़ शांत होने का नाम नहीं ले रही  है। प्रदर्शनकारी (demostrations) उग्र हो रहे हैं। मिन्नेसोटा में एक पुलिस स्टेशन (police station) को आग के हवाले कर दिया गया, अमेरिका के कई शहरों में कर्फ्यू लग चुका है। साथ ही वामपंथी आतंकवादी संगठन एंटीफा का नाम फिर से चर्चाओं में है। इसे बैन करने की मांग खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उठाई है। ट्रम्प ने अमेरिका में फैली सारी आगजनी और उग्र प्रदर्शन के लिए एंटीफा को ही जिम्मेदार ठहराया है।

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अपने ही देश को क्यों नुकसान पहुचा रहा है एंटी फासिस्ट एंटीफा
अमेरिका को  निशाने पर ले चुके वामपंथी आतंकवादी संगठन एंटीफा उर्फ एंटी फासिस्ट को लेकर अटार्नी जनरल विलियम पी बार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन और खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प खुलेआम बयान दे चुके हैं। एंटीफा से जुड़े लोगों पर अभियोग चलाए जाने की खुलेआम बहस जारी है। आखिर ये कौन लोग हैं, कहां से आते हैं, देश को नुकसान पहुंचाने के लिए किसी भी हद तक क्यों उतर आते हैं।

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लेफ्ट सियासत का अहम हिस्सा है एंटीफा
सबसे बड़ा सवाल, क्या ये एंटीफा हर उस जगह सक्रिय है जहां वामपंथ जोर पकड़ता है। जी हां, हमारा इशारा दिल्ली और अर्बन नक्सल से है। अगर आपको याद हो तो दिल्ली के दंगों की शुरुआत में जामिया मिल्लिया इस्लामिया और जेएनयू के छात्रों का जिक्र आया था। बाद में ये सांप्रदायिक दंगों में बदल गया था। अगर आप कभी जेएनयू परिसर के अंदर गए होंगे तो आपने टेप वगैरह से दीवारों और छतों पर एंटीफा लिखा हुआ भी देखा  होगा। दिल्ली के दंगों और वाशिंगटन में भड़की आग के बीच क्या कोई कनेक्शन है?

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रंगभेद के खिलाफ मुखर संगठन है एंटीफा
अमेरिका में एंटीफा का सीधा-सादा मतलब फासीवाद के विरोधी संगठन से लिया जाता है। अगर आपने भारतीय अर्बन नक्सल की बयानबाजी सुनी होगी तो इसमें भी फासीवाद का जिक्र अक्सर किया  जाता है। आपको भारत के इतिहास में फासिस्ट जैसा कोई शब्द नहीं मिल सकेगा। मगर सत्तारूढ़ सियासी दल भाजपा से लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संगठन तक के लिए खुलेआम फासिस्ट लफ्ज गाहे-बगाहे सुनाई दे जाएगा। अमेरिका में एंटीफा संगठन को नाजिस्ट, फासिस्ट, श्वेत रंग भेद के खिलाफ लोगों के लिए खिलाफ माना जाता है।

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शांतिपूर्ण प्रदर्शन या फिर हिंसक आतंकी गिरोह...

अमूमन एंटीफा की पहचान शांती पूर्ण प्रदर्शन, रैलियां और वाद-विवाद है, मगर मौका मिलते ही इनका एक उग्र धड़ा पुलिस से लेकर सरकार के खिलाफ हर दर्जे की हिंसा पर उतारू हो जाता है। वहीं इस हिंसक गिरोह के गायब होने के बाद दूसरा शांति प्रिय चेहरा सरकार से इंसाफ मांगने के लिए कलम हाथ में उठा लेता है। हालांकि एंटीफा की गतिविधियां डायरेक्ट एक्शन और हिंसा का समर्थन करती दिखाई देती हैं।

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मानव श्रृंखला बनाने वाले काले चोगे वाले एंटीफा वॉलंटियर्स
एंटीफा की थोड़ी तफ्तीश करें तो वामपंथी नेता ये दावा करते हैं कि एंटीफा सिर्फ फासिस्ट विरोधी शब्द है, इसका आतंक से कोई लेना नहीं है। ये सिर्फ एक आंदोलन है। इसके मानने वाले  हैं, वो अपने विचार और सिद्धान्त रखते  हैं। अमूमन अमेरिका में रंगभेद के मामले सामने आने पर एंटीफा के सदस्य सामने दिखाई देते हैं, ये काले कपड़े पहने होते हैं। ये दक्षिणपंथी विचारधारा का खुलकर विरोध करते हैं। मानव श्रृंखला बनाकर दक्षिण पंथी विचारधारा के लोगों का विरोध करते हैं। जाहिर है, इससे किसी को कोई तकलीफ नहीं है।

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मगर जब-तब तोड़-फोड़, आगजनी और हिंसा के पीछे भी इन्हीं का हाथ साबित होता है। काले चोगे के पीछे छिपे चेहरों की पहचान नहीं हो पाती, ये भाग चुके होते हैं। वहीं इनकी बातों में आकर सड़कों पर निकल आए मासूम बाद में पुलिस के दमन का शिकार बनते हैं। शायद यही वजह है कि अब अमेरिकी राष्ट्रपति को एंटीफा को दुनिया भर में बैन करने की आवाज बुलंद करनी पड़ रही है।

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