Thursday, Sep 29, 2022
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will people of india not be able to taste afghani fruits this year ?

क्या इस साल नहीं चख पाएंगें भारत के लोग अफगानी फ्रूट्स ?

  • Updated on 8/20/2021

नई दिल्ली/अनामिका सिंह। देशभर के लोग साल भर अफगानी फलों के आने का इंतजार करते हैं लेकिन इस साल शायद आपको रसभरे अफगानी फलों का स्वाद चखने को ना मिले। तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा और उसके बाद होने वाले संधर्ष का असर एशिया की सबसे बडी मंडी आजादपुर में भी देखने को मिल रहा है।

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गर्माते माहौल के चलते अफगानी फलों की आवक
लगातार गर्माते माहौल के चलते अफगानी फलों की आवक ठप्प हो गई है। वरना इस मौसम में मंडी के अंदर अफगानी फलों की आवक काफी अधिक हुआ करती थी, उसमें भी अंगूरों की। बता दें कि अफगान में अगस्त से नवंबर तक का मौसम अंगूरों का होता है। आकार में बडे और काले अफगानी अंगूरों के अलावा हरे रसीले अंगूरों से पूरा बाजार सजा रहता है। इन अंगूरों को चमन के अंगूरों के नाम से जाना जाता है जोकि काबूल में बहने वाली एक नदी के किनारे उगाए जाते हैं।

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10 कंटेनर हर साल आवक होती थी
हर साल अंगूरों की की आवक कम से कम 10 कंटेनर हुआ करती थी। लेकिन बीते कुछ दिनों से एक कंटेनर अंगूर भी आजादपुर मंडी में नहीं पहुंच पाए हैं। इन अंगूरों के दाम भी अन्य विदेशी फलों के मुकाबले काफी कम हुआ करते थे। बीते साल चमन के अंगूरों को 100 से 150 रूपए प्रतिकिलो की थोक दर से बेचा गया है।

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शारदा फल की भी होती थी डिमांड
वहीं इसके बाद दूसरा फल जो सबसे ज्यादा इस मौसम में भारत आया करता था, वो है खरबूजे की ही बिरादरी में आने वाला शारदा फल। जोकि 100 रूपए प्रतिकिलो के थोक दाम से बेचा जाता था और इनकी डिमांड भी इसकी मीठास की वजह से भारत में काफी थी। इसके भी पिछले साल रोजाना 8 से 10 कंटेनर अफगानिस्तान से आया करते थे। लेकिन इस साल शारदा का स्वाद भी चखने को नहीं मिलने वाला है।

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मामला निपटे तो शायद हो आवक
आजादपुर मंडी के थोक फल व्यवसायी राजकुमार भाटिया ने कहा, कि हर साल करीब 3-4 महीने चमन के अंगूरों व शारदा की काफी डिमांड रहती है। इसकी वजह इन दोनों फलों में शर्करा की मात्रा का कम होना भी है लेकिन इस साल अफगानिस्तान में तालिबान की इंट्री ने फलों की आवक को पूरी तरह से बाधित कर दिया है। अगर अफरा-तफरी का माहौल खत्म हो जाए तो शायद इन फलों का स्वाद भारत के लोग चख पाएं।

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