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lodoicea-tree-in-noida-fruit-after-126-years

दरियाई नारियल के पेड़ पर 126 साल बाद आए फल

  • Updated on 3/9/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत (India) में अपनी तरह के इकलौते वृक्ष नारियल के पेड़ लोडोसिया मालदीविका’ (Lodoicea) पर 126 साल बाद पहली बार फल आया है। इस पेड़ पर दो दरियाई नारियल लगे हैं जिन्हें हाल ही में तोड़कर सुरक्षित रख लिया गया है। एक फल का वजह 8.5 किलोग्राम है, जबकि दूसरे फल का वजन 18 किलोग्राम है। इसे ‘डबल कोकोनट’ भी कहते हैं।

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यहां स्थित भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) के वैज्ञानिक डाक्टर शिव कुमार ने बताया कि पश्चिम बंगाल (West Bengal)  के हावड़ा स्थित आचार्य जगदीशचंद्र बोस इंडियन बोटैनिक गार्डेन (Botanical garden) में 1894 में इसका पौधा सेशेल्स से लाकर लगाया गया था। इसमें 2006 में फूल आने पर पता चला कि यह मादा फूल है। उन्होंने बताया कि परागण के लिए 2006 में श्रीलंका (Sri Lanka) के पेरिडीनिया गार्डेन से पराग लाकर परागण की प्रक्रिया शुरू की गई।

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लेकिन इसमें सफलता 2013 में तब मिली जब थाईलैंड (Thailand) से लाए गए पराग से परागण की प्रक्रिया की गई। इस पेड़ में दो ही फल आए जिसमें से पहले फल को 15 फरवरी को और दूसरे फल को 26 फरवरी को तोड़ा गया।

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शिव कुमार ने बताया कि मालदीव (Maldives)  में इस फल को स्टेटस सिंबल के तौर पर देखा जाता है, लेकिन भारत की जलवायु में इसे विकसित करना भारतीय वैज्ञानिकों की एक बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है। यह वृक्ष मूल रूप से सेशेल्स में पाया जाता है और हावड़ा (Howrah) के बोटैनिक गार्डेन में और पौधे लगाने के लिए भारत में सेशेल्स के उच्चायुक्त टी.सेल्बी पिल्लै के साथ 21 अक्तूबर, 2019 को एक बैठक की गई और पिल्लै ने 21 नवंबर को हावड़ा आकर यह वृक्ष देखा।

उल्लेखनीय है कि 2019 के प्रयागराज (Prayagraj)  कुम्भ मेले में दरियाई नारियल का बीज प्रर्दिशत किया गया था जो दुनिया का सबसे बड़ा बीज है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पंडाल में बड़ी संख्या में लोगों ने इस बीज को देखा था।

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