Monday, Oct 22, 2018

मिलिए ‘कहानीवाली नानी’ से, WhatsApp पर सुनाती हैं कहानियां

  • Updated on 8/30/2017

Navodayatimes नई दिल्ली/जेता बेंगलुरु की सरला मिनी बच्चों को वाट्सएप पर कहानियां रिकॉर्ड कर सुना रही हैं। रिटायर्ड टीचर सरला बच्चों के बीच ‘कहानीवाली नानी’ के नाम से मशहूर हैं। उनका कहना है कि कहानियां सुनना बच्चों का अधिकार है। अपने मिशन के जरिए वह हर बच्चे को ‘बेडटाइम स्टोरीज’ उपलब्ध कराना चाहती हैं। इसके लिए बस उन्हें एक वाट्सएप मैसेज करना होता है और अपना नाम, जन्मतिथि और किस भाषा (हिंदी या अंग्रेजी)में बच्चा कहानी सुनना चाहता है, ये बताना होता है। 

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पहले स्क्रिप्ट तैयार करती हैं

सरला हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में कहानियां रिकॉर्ड करती हैं। हर कहानी 8 मिनट की होती है। इसके लिए सरला मिनी काफी रिसर्च भी करती हैं। वह बताती हैं, ‘मैं दुनिया भर की लोक कथाओं पर रिसर्च करती हूं। हर कहानी के अलग-अलग वर्शन को पढ़ती हूं, फिर स्क्रिप्ट तैयार करती हूं और तब जाकर रिकॉर्ड करती हूं। हालांकि मैं सीधे सब्सक्राइबर को ये भेजने से पहले अपनी भतीजी को भेजती हूं फिर उसकी प्रतिक्रिया बाद ही मैं इसे कहीं और फॉरवर्ड करती हूं।

मैं अपनी कहानियों को और बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं, जिससे छोटे-छोटे बच्चे भी इसे समझ सकें। जैसे-जैसे परिवार छोटे-छोटे होते जा रहे हैं। बच्चों की अपने नाना-नानी या दादा-दादी से बॉन्डिंग कम होती जा रही है। मेरी कोशिश है कि मैं हर बच्चे तक कहानियों को पहुंचा सकूं क्योंकि, ये उनका अधिकार है।’ सरला इसके लिए कोई भी चार्ज या फीस नहीं लेती हैं। वह बताती हैं कि बच्चे बेसब्री से उनकी कहानियों का इंतजार करते हैं।  

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 पहले घर के बच्चों को ही सुनाती थी
कभी शिक्षिका रहीं सरला मिनी फिलॉसफी और साइकोलॉजी विषयों से ग्रेजुएट हैं। पहले वह अपने घर के बच्चों को ही कहानियां रिकॉर्ड कर भेजा करती थीं। घर के लोगों ने उनके इस अनूठे तरीके को सराहा और फिर उनकी भतीजी पारुल ने उन्हें सलाह दी कि वह हर हफ्ते एक कहानी रिकॉर्ड करें। इसके बाद सिलसिला चल निकला और सरला ने तय किया कि वह वाट्सऐप के जरिए ऐसे बच्चों को कहानियां सुनाएंगी, जो अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ नहीं रहते।

सरला कहती हैं कि जब मैं छोटी थी, तब ऐसा एक दिन भी नहीं गुजरता था, जब मैंने अपनी नानी या दादी से कहानी ना सुनी हो। बिस्तर पर जाने के बाद मैं बेसब्री से नानी का इंतजार करती थी कि अब वह मुझे कहानी सुनाएंगी। ये कहानियां ज्यादातर लोक कथाएं या फिर रामायण और महाभारत से होती थीं। मैं सुनते-सुनते सो जाया करती। तब तकनीक इतनी विकसित नहीं थी। लैपटॉप और मोबाइल फोन जैसी कोई चीज नहीं थी। अब हमारे पास ये सब चीजें हैं लेकिन नानी-दादी की कहानियां मुश्किल से ही कोई बच्चा सुन पाता हो।    

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विदेशों में भी चर्चे
सरला देश ही नहीं, विदेश में भी लोकप्रिय हो रही हैं। फिलहाल दुनियाभर में 6,000 से ज्यादा बच्चे उनकी कहानियों को सुन रहे और पसंद कर रहे हैं। वह कहानियों को रिकॉर्ड करके अपने सब्सक्राइबर्स को भेजती हैं। इसके लिए बस अपना नाम, जन्मतिथि और कहानी की भाषा क्या हो, ये लिखकर उनके वाट्सऐप नंबर पर भेजना होता है।

इसकी शुरुआत बस 4 महीने पहले हुई है लेकिन कुछ ही समय में इसके सब्सक्राइबर्स की संख्या अच्छी-खासी हो गई है। कहानीवाली नानी के चर्चे अब दुबई, लंदन, अमरीका, नाइजीरिया, स्विटजरलैंड और ऑस्ट्रेलिया तक हैं। 

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